कल्पनापूरा संग्रह

रचना 502 / 789

तुम अपरिहार्य हो

तुम अपरिहार्य हो …. इसलिए दुखते हो बहुत। *Once upon a time in 2007

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह