कल्पनापूरा संग्रह

रचना 503 / 789

बिना लिखे भी लिख सकती हूँ तुम्हारा नाम

बिना लिखे भी लिख सकती हूँ तुम्हारा नाम...... देखा.... पढ़ लिया न तुमने 😊 *एक ही सौंधी बात को हर मौसम में अलग अलग तरह से कह देना भी प्रेम है। बने रहें .....बातों में प्रेम में ।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह