कल्पनापूरा संग्रह

रचना 512 / 789

तेरे कांधे पर ठहर जाता है दिसंबर और रुकी रह जाती है जनवरी

तेरे कांधे पर ठहर जाता है दिसंबर और रुकी रह जाती है जनवरी आना। *पेंट ब्रश वाला सुकून भव्या ने भेजा है।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह