कल्पनापूरा संग्रह

रचना 515 / 789

पत्ते कम हो या परिंदे

पत्ते कम हो या परिंदे दरख़्त का दुःख एक सा है । मुझे तुमसे कुछ ऐसी विकलता चाहिए। 😊

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह