ज़िन्दगी को यूं खिसकते हुए देखती हूँ
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ज़िन्दगी को यूं खिसकते हुए देखती हूँ तो लगता है अच्छा हुआ उस रोज़ मैंने पहाड़ को प्रेमी चुना सब के पास होना चाहिए पहाड़ सा एक मौन पत्थर।
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह
ज़िन्दगी को यूं खिसकते हुए देखती हूँ तो लगता है अच्छा हुआ उस रोज़ मैंने पहाड़ को प्रेमी चुना सब के पास होना चाहिए पहाड़ सा एक मौन पत्थर।