खाली हम ...खाली तुम
खाली हम ...खाली तुम *मैंने चूमने के लिए वो माथा चुना जो बंजर था। ख़ाली जगह पर ही पसरा जा सकता था बेवज़ह ...बेपनाह थकान हो या प्यास दोनों ख़ाली के मायने जानते हैं। नींद हो या स्पर्श दोनों ख़ाली सिरहाने... ख़ाली बाहों के देनदार हैं हवा हो या जल दोनों के लिए ख़ाली एक गति एक दिशा है। मन हो या देह दोनों बनते ही ख़ाली हो जाने के लिए हैं कागज़ हो या कविता दोनों को ख़ाली शब्द चाहिए ज़मीन और बीज के बीच का प्रेम एक ख़ाली जगह को तरसता है। उम्मीद और उजास ख़ाली हथेलियों और उंगलियों के कसाव में ही उगते हैं। उदासी और दुःख ख़ाली आँखें ही छिपा सकती हैं । प्रतीक्षा और उदासी ख़ाली खिड़की पर ही उकेरी जा सकती है । चाँद और रात एक ख़ाली आसमान में ही इश्क़ फरमा सकते हैं । आँसू और मुस्कान लुढ़कर ख़ाली कांधे पर ही सोखे रोके जा सकते हैं। प्रेम एक ख़ाली और प्रेमी दो ख़ाली ध्वनियां हैं मेरे पास ख़ाली तुम हो तुम्हारे पास सिर्फ़ मैं ......ख़ाली ख़ाली एक रिक्त अशब्द है भरा ...गदराया हुआ लबालब सम्पूर्ण