कल्पनापूरा संग्रह

रचना 525 / 789

पहले जुगत तुम्हारे लिए तुम जैसा बनने की थी अब बस खुद में खु…

पहले जुगत तुम्हारे लिए तुम जैसा बनने की थी अब बस खुद में खुद जैसा रहने की है। वक्त सिखाता है खुद पर से पंख नोच देना और अपने नाखून तक तोड़ देना। अपनी चोंच को घिस घिस कर नुकीला कर देना उस चील की भांति जो आत्म मंथन करते हुए एकांतवास करती है और नई होकर उभर आती है। खुद को नया करना आना चाहिए। जी जाना खुद के लिए होता है जीना सब के लिए।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह