कल्पनापूरा संग्रह

रचना 532 / 789

करार तो ये हुआ था

करार तो ये हुआ था कि मैं फूल रहूंगी तुम खुशबू रहोगे बरसों बाद तक l फिर क्या हुआ कि हम गुलकंद भी हुए, इत्र भी हुए बस प्रेमी न रहे।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह