कल्पनापूरा संग्रह

रचना 536 / 789

दो ठंडे शहरों के बीच इक मुलायम स्वेटर आसानी से बनता उधड़ता…

दो ठंडे शहरों के बीच इक मुलायम स्वेटर आसानी से बनता उधड़ता रहा। तुम्हारे मेरे हाथ उलझे सुलझे ऊनी गोले हैं। हर रंग के कोसे कोसे

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह