लिखना खुद में फ़फ़ूँद उगाने जैसा है ।
✣
लिखना खुद में फ़फ़ूँद उगाने जैसा है । खुद के ऐसे हिस्से को आसरा देना जो दुखता हो , व्यर्थ हो पर अपना अस्तित्व मांगता हो।
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह
लिखना खुद में फ़फ़ूँद उगाने जैसा है । खुद के ऐसे हिस्से को आसरा देना जो दुखता हो , व्यर्थ हो पर अपना अस्तित्व मांगता हो।