कल्पनापूरा संग्रह

रचना 554 / 789

कुछ तेरा लहज़ा

कुछ तेरा लहज़ा कुछ वो लफ्ज़ रहे होंगे । मेरे अजनबी होने की जो वजह रहे होंगे ।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह