कल्पनापूरा संग्रह

रचना 562 / 789

कागज़ होने से पहले वो "ज़िन्दगी" था ।

कागज़ होने से पहले वो "ज़िन्दगी" था । शब्द खुद चुनते हैं अपने हिस्से की महफ़िल या फिर अपने हिस्से का खामोश शोर। जाने इतनी किताबें कहाँ जाती हैं ?

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह