कल्पनापूरा संग्रह

रचना 564 / 789

मन जब कच्चा कच्चा होता है तो मैं गमलों के बीच मिट्टी से सन…

मन जब कच्चा कच्चा होता है तो मैं गमलों के बीच मिट्टी से सन जाती हूं। उसको छूने गूंथने से सारी नेगेटिव एनर्जी और विचार दूर हो जाते हैं। कुछ समय पहले बिताया समय अब गमलों में हरियल दिख रहा। उगा हुआ कुछ भी हो सुंदर लगता है। अपनी फसल का अपना स्वैग है चाहे एक बार की ही तरकारी बने।

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