कल्पनापूरा संग्रह

रचना 570 / 789

मैं टूट सकती थी अगर मैंने प्रेम सिर्फ़ स्पर्श किया होता ।

मैं टूट सकती थी अगर मैंने प्रेम सिर्फ़ स्पर्श किया होता । प्रेम से कहीं पहले मैं स्त्री हुई । यह कवच प्रेम को भेद न सका। प्रेम ने मुझे धारण किया भेदा नहीं।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह