कल्पनापूरा संग्रह

रचना 575 / 789

किताब पतंग है

किताब पतंग है.... उड़ जाने दो न मांझा कसो न ढील दो न शोर मचाओ न भागो पीछे। बस देखते रहो दूर तक देर तक मुस्कुराते हुए उसे ओझल होते हुए। @ bookfair2025

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह