कल्पनापूरा संग्रह

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पसंदीदा शख्स वो नहीं होता जिसे चाहा जाए बल्कि वो होता है जि…

पसंदीदा शख्स वो नहीं होता जिसे चाहा जाए बल्कि वो होता है जिसे चाहा जाए नकारा जाए । फिर चाहा जाए। एक बार फिर नकार दिया जाए। और फिर चाहा जाए। बार बार बेशुमार बार। हां का ना होना ना का हां होते रहना ही प्रेम है। एक प्रेमी छिपा है यहीं कहीं एक प्रेमिका होगी यहीं कहीं। प्रेम भी जाने कहां होगा जाने कहां न होगा।

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