कल्पनापूरा संग्रह

रचना 582 / 789

पसंदीदा शख्स वो नहीं होता जिसे चाहा जाए बल्कि वो होता है जि…

पसंदीदा शख्स वो नहीं होता जिसे चाहा जाए बल्कि वो होता है जिसे चाहा जाए नकारा जाए । फिर चाहा जाए। एक बार फिर नकार दिया जाए। और फिर चाहा जाए। बार बार बेशुमार बार।

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