कल्पनापूरा संग्रह

रचना 586 / 789

तुम मेरे हिस्से में उतने ही आए

तुम मेरे हिस्से में उतने ही आए जितनी एक हथेली में आ सकती है रेत l जितनी एक मुठ्ठी में आ सकती है बारिश l जितना एक आगोश में आ सकता है पहाड़।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह