तुम मेरे हिस्से में उतने ही आए
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तुम मेरे हिस्से में उतने ही आए जितनी एक हथेली में आ सकती है रेत l जितनी एक मुठ्ठी में आ सकती है बारिश l जितना एक आगोश में आ सकता है पहाड़।
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह
तुम मेरे हिस्से में उतने ही आए जितनी एक हथेली में आ सकती है रेत l जितनी एक मुठ्ठी में आ सकती है बारिश l जितना एक आगोश में आ सकता है पहाड़।