एक बार फिर साथ मुबारक
एक बार फिर साथ मुबारक ... अच्छा बताओ...पेड़ हरा क्यों होता है?लड़के ने लड़की से पूछा क्योंकि सारे पत्ते जोड़े में होते हैंI एक पत्ता एक पत्ती ... लड़की ने मासूम सी शक्ल बना दी। अच्छा ? कमाल है... लड़का हँस दिया। और क्या ...दोनों दिन भर हँस हँस कर एक दूसरे से बातें करते रहते हैं।गुप चुप प्रेम से भरे हुए। देखो देखो पेड़ लहराया अभी अभी..सारे पत्ते पत्तियाँ हम दोनों के बारे में बातें कर रहे। तो फिर ये कहो...जो पत्तियां नीचे सूख गईं वो प्रेमी नहीं रहे क्या? लड़के ने फिर पूछा। अरे नहीं....एक रूठ कर गिर गया तो दूसरा उसको मनाने पीछे पीछे चला आया होगा जरूर। देखो तभी पक्के प्रेम का रंग भी गहरा हो गया ...लड़की ने एक भूरा पत्ता उठाकर कहा। लड़के ने एक हरे पते और एक सूखी पत्ती को फिर सटा कर पूछा... इतने सालों बाद क्या ये हम दोनों हैं? बिछड़े हुए? लड़की चुप हो गयी। बहुत देर सूखे पत्तों को घूरती रही ...रोती रही। फिर पास आकर लड़के के हरे पत्ते पर अपना हाथ रखा और बोली ... एक बार फिर साथ मुबारक ..... हमें ! इस बार पेड़ बस एकटक देखता रह गया। गहरा हरा होता हुआ। *ठीक ऐसे ही मेरी रज़ा आँखों में रहती है और दरख्वास्त होंठों पर बिना लिपि .... बिना ध्वनि वाली तुम्हारे लिए एक बार फिर साथ मुबारक हमें। सदा रहे।