कल्पनापूरा संग्रह

रचना 606 / 789

स्त्री कस्तूरी है

स्त्री कस्तूरी है अपनी देह में अपनी गंध से तुम तक तुम्हारे पौरुष के लिए l एक प्रेम ऐसा भी निर्वाण देती सहस्त्रधारा

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह