कल्पनापूरा संग्रह

रचना 607 / 789

काफ़िर नैना

काफ़िर नैना .... अब तुम्हारा नहीं अपने लिखे का इंतजार करते हैं.... तुम्हें देखने के लिए। शुक्रिया।

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