कल्पनापूरा संग्रह

रचना 611 / 789

वो कहते हैं

वो कहते हैं परखना मत परखने से कोई अपना नहीं रहता ये भी सच है कि परख लो तो कभी अपनी , कभी एक दूसरे की नजरों में गिरने का डर नहीं रहता l

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह