आओ पास देखो
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आओ पास देखो उस दराज़ में कुछ अल्हड़ ग़ज़लें होंगी । बिना मिसरे वाली तुम्हारे जाने के बाद कोई बहर मिली ही नहीं। न कोई मुकम्मल हुआ न कोई शक्ल बनी। छू कर देखो इक लहर सी उठेगी अभी। बस अभी। दूर कहीं मुझमें भी।
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह