तुम सांझा थे मेरे और मैं शेष तुम्हारी कुछ द्वंद किसी के हिस्से नहीं आते।
रचना 614 / 7893 अप्रैल 2025तुम सांझा थे मेरे✣तुम सांझा थे मेरे और मैं शेष तुम्हारी कुछ द्वंद किसी के हिस्से नहीं आते।मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह