कल्पनापूरा संग्रह

रचना 620 / 789

बाज़ दफ़ा वो नहीं होता

बाज़ दफ़ा वो नहीं होता बाज़ दफ़ा मैं भी नहीं हो पाती । *इश्क़* साबुत इस लिए भी नहीं रहा वो अधूरा लफ्ज़ बाज़ दफ़ा ऐसे ही लिखा गया। ऐसे ही पढ़ लिया गया बाज़ दफ़ा ।

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