कल्पनापूरा संग्रह

रचना 621 / 789

बहुत ढूँढ़ा ।

बहुत ढूँढ़ा । शब्दों से ज्यादा महफूज़ रुमानी जगह बनी ही नहीं । तुम्हारे लिये l

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