प्रेम को न कभी पूर्णिमा मिली न पूरी अमावस ही। एक चांद मिला तथास्तु सा
रचना 623 / 78922 अप्रैल 2025प्रेम को न कभी पूर्णिमा मिली✣प्रेम को न कभी पूर्णिमा मिली न पूरी अमावस ही। एक चांद मिला तथास्तु सामूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह