कल्पनापूरा संग्रह

रचना 626 / 789

बस इंतज़ार लपेटा है

बस इंतज़ार लपेटा है और तुम इसे खूबसूरती कह रहे हो l इंतज़ार कत्थई होने को है क्षितिज के उस पार l कोई चांद बुझाओ तो बात बने।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह