कल्पनापूरा संग्रह

रचना 650 / 789

ईश्वर अपनी प्यारी चीज़ें अक्सर गलत जगह रख कर भूल जाता है।

ईश्वर अपनी प्यारी चीज़ें अक्सर गलत जगह रख कर भूल जाता है। जैसे मैं इधर और तुम उधर ।

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