कल्पनापूरा संग्रह

रचना 651 / 789

तुमको देख कर मुस्कुराती हूं तो लगता है तुम एकमात्र दुःख हो…

तुमको देख कर मुस्कुराती हूं तो लगता है तुम एकमात्र दुःख हो जो मेरे मन का है। मुझे बेसलीका और बेतरतीब लोग हद पसंद हैं। मैंने पहले खुद को पसंद किया फिर तुम पर अंगुली धर दी..... ज़िन्दगी

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह