हम थकाऊ उबाऊ लोग हैं ।
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हम थकाऊ उबाऊ लोग हैं । हम धकेलते हैं । बचपन में बचपने को बुढ़ापे में बुढ़ाने को प्रेम में प्रेमी को चाह में चाहना को जाग में जागते को नींद में उनींदे को हार में हारे को सुंदर में सौंदर्य को प्रसिद्ध में सिद्ध को रिक्तता में रिक्त को आसक्ति में आसक्त को हम कभी गले नहीं लगते । हमें आता ही नहीं बाहों में भर लेना चूमना ठहरना कांधे पर सर रखना उस स्थिति में स्थित हो रहना। बस बिंदु हो जाना। पर... हम रोना कलपना अच्छे से जानते हैं । दुख के पहाड़े मुंह जबानी रखते हैं। थकान में भी हमारा थकना मना है चलो धकेलो ज़ोर लगा के ...हाईशा l
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह