कोई अकेले नहीं आता
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कोई अकेले नहीं आता जैसे प्रेम के साथ उदासी और उदासी के साथ तुम। जैसे तुम्हारे साथ प्रेम और प्रेमी के साथ तुम । जैसे तुम्हारे साथ मैं और मेरे साथ तुम। जैसे ना के साथ हां और हां के साथ नहीं जैसे आहट के साथ चुप और चुप्पी के साथ शोर जैसे मन के साथ मीत और मीत के साथ मन बस ईश्वर के साथ ईश्वर ही आता है और दुविधा दूर हो जाती है।
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