कल्पनापूरा संग्रह

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गुनाह और गलती को भली भांति पहचानता है प्रेम

गुनाह और गलती को भली भांति पहचानता है प्रेम एक रोज़ दो आसान लोग कुछ पल साथ बैठे और फिर मन कहकर अपनी अपनी राह लौट गए। बीच जो कठिन था लुप्त हो गया। ईश्वर ने पहले इसे गलती माना उसे मिटाया, फिर गुनाह लिखकर प्रेम उनकी तरफ फूंक दिया। दो दीवाने दीवाने तीन

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