कल्पनापूरा संग्रह

रचना 673 / 789

मैं संभावना से बनी हूं

मैं संभावना से बनी हूं तुम अहंकार से एक अल्हड़ एक अघोरी मेरे दुःख में घुंघरू बंधे हैं.... तुम बजते रहते हो आसपास ।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह