कल्पनापूरा संग्रह

रचना 674 / 789

उसने कहा सुंदर रहना

उसने कहा सुंदर रहना .. धीरे धीरे मैं देखने,कहने, सुनने से इतर ध्यान होती गई। मूंदी आंखों से जो रोज़ खुद में दिखा वो वाकई ईश्वर था अलौकिक सुंदर हूबहू तुम सा मेरे सुंदर का प्रतिबिंब

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह