कभी कभी मिलने के लिए नहीं
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कभी कभी मिलने के लिए नहीं कुछ पल यूं ही साथ रुककर कहने सुनने के लिए भी हो जाता है प्रेम। मन पहचान लेता है कि यही वह चट्टान है जिसे भेदना है और यही वह प्रहार है जो भेद देगा तुम्हारी हिमशिखा।
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह