दुःख और एकांत में फिर फिर बन जाने वाला चेहरा आपका प्रेम है।
रचना 692 / 78929 सितंबर 2025दुःख और एकांत में फिर फिर बन जाने वाला चेहरा आपका प्रेम है।✣दुःख और एकांत में फिर फिर बन जाने वाला चेहरा आपका प्रेम है।मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह