कल्पनापूरा संग्रह

रचना 699 / 789

मैंने पूछा ...प्रेम

मैंने पूछा ...प्रेम? उसने कहा...हां मैंने फिर पूछा...प्रेमी? उसने कहा ... ना दो संक्षिप्त कविताएं अधूरी पर एक गूढ़ कहानी पूरी हुई। बिना कलम बिना पाती बिना स्याही

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह