कल्पनापूरा संग्रह

रचना 702 / 789

सुंदर रहीं वो स्त्रियां जो प्रेम में बुझ गई

सुंदर रहीं वो स्त्रियां जो प्रेम में बुझ गई ... सुघड़ रहे वो पुरुष जो प्रेम में जलते रहे।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह