कल्पनापूरा संग्रह

रचना 703 / 789

जब कभी लगता है ज़िंदगी पत्थर है

जब कभी लगता है ज़िंदगी पत्थर है तभी धार फूट पड़ती है । ईश्वर से बड़ा प्रेमी कोई न हुआ।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह