कल्पनापूरा संग्रह

रचना 704 / 789

तुम उठकर जाते हो तो ईश्वर हाथ पकड़ कर बैठ जाता है।

तुम उठकर जाते हो तो ईश्वर हाथ पकड़ कर बैठ जाता है। अतिरिक्त कोई नहीं रहता। न मैं अति रहती हूं... न रिक्त।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह