कल्पनापूरा संग्रह

रचना 716 / 789

खामोशी आवाज़ की उतरन है।

*खामोशी आवाज़ की उतरन है। आवाज़ खामोशी का पैरहन । इस दिसंबर तुम किस बर्फ़ से ढके रहोगे प्रेम? *संवाद के दो ही कोने एक तुम एक मैं।

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