कल्पनापूरा संग्रह

रचना 639 / 789

हज़ार गुना होकर लौटना

तुम हज़ार गुना होकर लौटना मैं रत्ती भर भी कम न होकर आऊंगी। विराम और अविराम के बीच अर्धविराम प्रेम है।