कभी मिले तो
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कभी मिले तो कांधे पर सर नहीं ....काश रखेंगे प्रतीक्षा आरोह से अवरोह तक अवरोह से आरोह तक कैसे भी लुढ़के दुखती बहुत है।
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कभी मिले तो कांधे पर सर नहीं ....काश रखेंगे प्रतीक्षा आरोह से अवरोह तक अवरोह से आरोह तक कैसे भी लुढ़के दुखती बहुत है।