कल्पनापूरा संग्रह

रचना 151 / 789

ज़िल्लत भी सलीकेदार होती है।

ज़िल्लत भी सलीकेदार होती है। तुम जैसा ...तुम्हारे जैसे का फ़र्क सिर्फ़ इश्क़ जानता है। अक्षर पर जरा सी हरकत दिल तोड़ देती है।😊 *कहिये कहिये ....मुझे बुरा कहिये।

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