ये बाज़ आ जाने वाली आंखें हैं ही नहीं... मानो कहा.... आ जाओ।
रचना 154 / 78918 सितंबर 2023ये बाज़ आ जाने वाली आंखें हैं ही नहीं✣ये बाज़ आ जाने वाली आंखें हैं ही नहीं... मानो कहा.... आ जाओ।मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह