कल्पनापूरा संग्रह

रचना 196 / 789

दुःख और एकांत में बार बार बन जाने वाला चेहरा ही आपका प्रेम है।

दुःख और एकांत में बार बार बन जाने वाला चेहरा ही आपका प्रेम है।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह