दुःख और एकांत में बार बार बन जाने वाला चेहरा ही आपका प्रेम है।
रचना 196 / 78929 सितंबर 2023दुःख और एकांत में बार बार बन जाने वाला चेहरा ही आपका प्रेम है।✣दुःख और एकांत में बार बार बन जाने वाला चेहरा ही आपका प्रेम है।मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह