कल्पनापूरा संग्रह

रचना 197 / 789

सूरत से किरदार की दौड़ में सूरत सरपट दौड़ी ......चिट्टे खरग…

सूरत से किरदार की दौड़ में सूरत सरपट दौड़ी ......चिट्टे खरगोश की तरह किरदार वहीं लिपट कर गिर पड़ा फिर उठ खड़ा हुआ। सूरत को उस पार चूमा गया। मुस्कान पहनाई गई। फिर कुछ देर बाद सारी सूरतों में मिला दिया गया। किरदार वहीं खड़े खड़े धूल झाड़ कर सुफेद हो गया। बोलो ... क से कछुआ क से किरदार *तुम क्या बने ? हम क्या रहे?

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