कल्पनापूरा संग्रह

रचना 217 / 789

Edited version of my old poem

Edited version of my old poem ... यहाँ कुछ टिकता क्यों नहीं? टिकती नहीं सफलता, पाते ही बढ़ जाती , और पाने की मानसिकता टिकता नहीं विश्वास, दोनों में से एक , कोई दगाबाज़ टिकता नहीं भाईचारा, इत्तू सा मेरा , तेरा क्यों है इतना सारा ? टिकती नहीं मुहब्बत , असमंजस में ... रिश्ता अपनाऊ या दौलत ? टिकता नहीं वादा, स्वार्थी फितरत , जरूरत से ज्यादा टिकती नहीं नज़र , है आज झुकी , कल दिखे ऊंचा प्रहर टिकती नहीं घडी की सुइयाँ , एक लाये गम, दूसरी देती खुशियाँ टिकती नहीं दोस्ती , जल जाती ...होते ही, यार की उन्नति टिकती नहीं मुस्कान , होठ पर धरता कम , छीनता ज्यादा इंसान टिकता नहीं रिश्ता , समय संग पक जाता , उम्र संग झड जाता टिकती नहीं जवानी चढ़ती सूरज की तरह, सूखती जैसे मरू में पानी टिकते नहीं आंसू, बहते ख़ुशी में और तब भी , जब मैं उदास हूँ टिकती नहीं दौलत , आज दिखे बेशुमार , जाने कब पलटे किस्मत टिकती नहीं जीत , विजयी आज तू , कल कहीं और हो संगीत टिकती नहीं हार, हूँ अभी पस्त लाचार , कल करूं संभल कर वार टिकती नहीं यादें , परत दर परत बिछ जाती , कब तक इसको लादें? टिकती नहीं आदत , नयी लगते ही, पुरानी की हो सहादत टिकता नहीं ईमान , है बहुत सस्ता , खरीदता -बेचता इंसान टिकती नहीं जुबान , फिसल -फिसल कर बची कहाँ इसकी पहचान? टिकती नहीं प्रार्थना, आज इस लिए ,कल उस लिए , भगवन् बदल बदल याचना टिकते नहीं जज़्बात , प्रेम नहीं, आवश्यकता वश निभाते एक दूजे का साथ टिकती नहीं शर्म , थी आँखों में ,अब है भी ? होता इसका भ्रम टिकती नहीं इच्छा , दिमाग माने ...अच्छा , दिल मांगे ...और अच्छा टिकता नहीं वजूद , जीवन भर कायम , मृतक का ,नहीं कही मौजूद और भी कई चीजें हैं जो टिकती नहीं , मेरी सोच और कलम भी टिकती नहीं , क्या आपको भी ऐसा सब लगता नहीं , आस पास ऐसा सब दिखता नहीं? इसी लिए तो कहती हूँ यहाँ कुछ टिकता नहीं टिकता है, तो रुकता नहीं ! (चाह कर भी रचना की लम्बाई कम नहीं कर पायी ) क्षमा.....😀😃😃😃😃😃

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह