कल्पनापूरा संग्रह

रचना 218 / 789

तुमको देखना, मुस्कुराना और कुछ भी नहीं मांगना

तुमको देखना, मुस्कुराना और कुछ भी नहीं मांगना.... तुम देखते .... सांस लेते से ईश्वर हो मुझमें

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह